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Sad Shayari - दर्द भरी शायरी

Sad Shayari - दर्द भरी शायरी 


ना जाने क्या कमी है मुझमें, ना जाने
क्या खूबी है उसमें,
वो मुझे याद नहीं करती, मैं उसको भूल
नहीं पाता

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तमाम उम्र उसी के ख़याल में गुजारी,
मेरा ख़याल जिसे उम्र भर  नहीं आया  

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मैं ख़ामोशी तेरे मन की, तू
अनकहा अलफ़ाज़ मेरा…
मैं एक उलझा लम्हा,
 तू रूठा हुआ हालात मेरा

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तेरी यादों के सितम सहते हैं हम;
आज भी पल-पल तेरी यादों में मरते हैं हम;
तुम तो चले गए बहुत दूर, हमको इस दुनियां में तन्हा छोड़कर;
पर तुम क्या जानो, बैठकर तन्हाई में किस कदर रोते हैं हम।
 
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हमारे प्यार का यूँ इम्तिहान ना लो;
करके बेरुखी मेरी तुम जान ना लो;
एक इशारा कर दो हम खुद मर जाएंगे;
हमारी मौत का खुद पर इल्ज़ाम ना लो।
  
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वादा करते तो कोई बात होती;
मुझे ठुकराते तो कोई बात होती;
यूँ ही क्यों छोड़ दिया दामन;
कसूर बतलाते तो कोई बात होती।
 
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वादा हमने किया था निभाने के लिए
एक दिल दिया था एक दिल पाने के लिए
उसने हमें मोहब्बत सिखा दी और कहा
हमने तुमसे मोहब्बत की थी  किसी और को जलाने के लिए 
  
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दिल से रोये मगर होंठों से मुस्कुरा बैठे
यूँही हम तुमसे दिल लगा बैठे
वो हमें एक लम्हा ना दे पाए
जिनके लिए हम अपना सारा सुकून गवां बैठे 
 
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ना मिलेगा जब उसे कोई हमारी तरह चाहने वाला
बहुत रोयेगा वो शख्स उस दिन हमें पाने के लिए  
 
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किसी की बेबसी का तमाशा ना बनाओ 
हर मजबूर शख्स बेवफा नहीं होता 
 
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खुदा जाने मोहब्बत में क्या दस्तूर है 
हमने जिसको चाहा वो हमसे दूर है 
हुस्न वालों में मोहब्बत की कमी होती है
या फिर चाहने वालों की तकदीर बुरी होती है 
 
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वो मेरा आखिरी जजीरा था 
रात जो आंसुओं में डूब गया 
 
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वफ़ा की जंग मत लड़ना बेकार जाती है 
ज़माना जीत जाता है मोहब्बत हार जाती है 
हमारा जिक्र छोड़ो  हम ऐसे लोग हैं जिनको 
ज़माना कुछ नहीं कहता जुदाई मार जाती है 

 
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उसके लिए सारी दुनिया से बगावत की थी 
याद आता है मैंने भी मोहब्बत की थी 
उसको छोड़ कर हँसते हुए घर आकर
इतना रोये थे की आंसुओं ने भी शिकायात की थी 
 
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हर एक  चेहरे पे गुमान उसका था
बसा ना कोई खाली दिल में ये मकान उसका था
तमाम दुःख मिट गए दिल से मेरे
जो ना मिट सका वो नाम उसका था

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कदम यूँ ही डगमगा गए रास्ते में;
वैसे संभालना हम भी जानते थे;
ठोकर भी लगी तो उसी पत्थर से;
जिसे हम अपना मानते थे।

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 सब हसीं चेहरे धोखेबाज़ होते हैं;
इस बात का हमें पहले इल्म ना था;
अब हुआ इल्म तो रो-रो दिल कहे;
किया पहले किसी ने ऐसा जुल्म ना था।

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 रोने दे आज हमको तू आँखें सुजाने दे
बाहों में ले ले और ख़ुद को भीग जाने दे
हैं जो सीने में क़ैद दरिया वो छूट जायेगा
हैं इतना दर्द के तेरा दामन भीग जायेगा


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 सच कहा था किसी ने तनहा रहना सीख लो
मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो रहना तनहा ही पड़ता है 


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काश कोई रास्ता मिल जाए तुझ तक पहुचने का 
कहर बन के बरस रही हैं मुझ पे यादें तेरी  

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जब याद तेरी आती है तो मुस्कुरा लेता हूँ
कुछ पलों के  लिए हर गम भुला देता हूँ
कैसे भीग सकती है आपकी पलकें
आपके हिस्से के आंसू तो में  बहा लेता हूँ


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वो करते हैं बात मोहब्बत की 
पर मोहब्बत के दर्द का उन्हें एहसास नहीं
मोहब्बत वो चाँद है जो दिखता है सबको 
पर उसे पाना सब के बस की बात नहीं

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आप काँटों से बच कर चलती हैं
मैंने फूलों से जख्म खाये हैं

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वो कितना मेहरबान था कि हजारों ग़म दे गया
हम कितने खुदगर्ज़ निकले कुछ ना दे सके मोहब्बत के सिवा

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तुम भी हो बीते हुए वक़्त की मानिंद, हुबहू
तुमने भी बस याद आना है, आना तो नहीं है

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वाह रे इश्क ! तेरा क्या कहना
जो  तुझको जान ले, तू उसी की जान ले 


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रोने की सजा ना रुलाने की सजा है
ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सजा है
हँसते है तो आँखों से निकल आते हैं आंसू
ये उस शख्स से दिल लगाने की सजा है

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लोग पूछते हैं कौन है वो जो तेरी ये हालत कर गया
मैं मुस्कुरा कर कहता हूँ
उस का नाम हर किसी के लब पर अच्छा नहीं लगता
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