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gham ka khazana tera bhi hai mera bhi

gham ka khazana tera bhi hai mera bhi
ye nazarana tera bhi hai mera bhi
apne gham ko geet banake ga lena
rag purana tera bhi hai mera bhi
tu mujhko aur main tujh ko samjahaun kya
dil divana tera bhi hai mera bhi
shahron shahron galiyon jis ka charcha hai
wo afsana tera bhi hai mera bhi
maikhane ki bat na kar waiz mujh se
aana jana tera bhi hai mera bhi

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