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Sapne hain aankho me

Sapne hain aankho me  magar nind kahi aur hai Dil to hai jism me magar  dhadkan kahi aur hai Kaise bya kare apna   hal-e-dil Jee to rahe hai magar  zindgi kahi aur hai....

​दिल में अब यूँ तेरे

​दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते है; ​जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते है​; ​​रक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो​;​ सू-ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते है​;​ ​और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो ​;​ दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते है​;​ इक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशन ​;​ मेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते है​;​ ​कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग; ​वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते है। ​

रची है रतजगो की चाँदनी

रची है रतजगो की चाँदनी जिन की जबीनों में; क़तील एक उम्र गुज़री है हमारी उन हसीनों में; वो जिनके आँचलों से ज़िन्दगी तख़लीक होती है; ढड़ाकता है हमारा दिल अभी तक उन हसीनों में; ज़माना पारसाई की हदों से हम को ले आया; मगर हम आज तक रुस्वा हैं अपने हमनशीनों में; तलाश उन को हमारी तो नहीं पूछ ज़रा उन से; वो क़ातिल जो लिये फिरते हैं ख़न्जर आस्तीनों में।